जलीय कृषि को बढ़ावा देने का प्रयास, क्या है मत्स्य संपदा योजना?
जलीय कृषि को बढ़ावा देने का प्रयास, क्या है मत्स्य संपदा योजना

जलीय कृषि को बढ़ावा देने का प्रयास, क्या है मत्स्य संपदा योजना?

जलीय कृषि को बढ़ावा देने का प्रयास, क्या है मत्स्य संपदा योजना?

2022 तक केंद्र सरकार द्वारा किसानों की आय को दोगुना करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। सबको पता है देश की अर्थव्यवस्था में किसान और कृषि एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाते है। इस लिए सरकार किसानों की आवश्यकताओं के अनुरूप विभिन्न प्रकार की योजनाओं का संचालन करती है। हाल में सरकार द्वारा मछली पालन अर्थात जलीय कृषि करने वाले किसानों को बढ़ावा दिया जा रहा है। भारत में मत्स्य पालन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से सरकार द्वारा प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना की शुरुआत की गई है।

मोदी सरकार ने इस योजना को "नीली क्रांति" का नाम दिया है। इस स्कीम के अंतर्गत जलीय कृषि करने वाले किसानों को बैंक ऋण, बीमा आदि अनेक प्रकार की सुविधाएं प्रदान की जाएगी। भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मछली पालक और चौथा सबसे बड़ा मछली निर्यात देश है। भारत में काफी संख्या में लोग मछली पालन के काम से जुड़े हुए है। प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना की अनुमानित लागत 20,050 करोड़ रूपए है। इस योजना से मछली पालन के क्षेत्र से जुड़े मछुआरों, मछली पलकों, मछली श्रमिकों, मछली विक्रेताओं और अन्य हित धारकों को फायदा होगा।

योजना का उद्देश्य नीली क्रांति के जरिए देश में मछली पालन क्षेत्र के सतत और जवाबदेह विकास को सुनिश्चित करना है। प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना 5 साल के लिए लागू किया गया है जो वित्तवर्ष 2020-21 से लेकर 2024-25 तक लागू रहेगा। इस योजना से मछली पालन क्षेत्र की गंभीर कमियों को दूर करते हुए उसकी क्षमताओं को भरपूर इस्तेमाल किया जा सकेगा। साथ ही मछली पालन क्षेत्र में 9% सालाना दर से वृद्धि के साथ 2024-25 तक 2 मिलियन मीट्रिक टन उत्पादन का लक्ष्य हासिल किया जा सकेगा।

क्या है प्रधानमंत्री मत्स्य सम्पदा योजना?

10 सितंबर, 2020 को नरेंद्र मोदी ने प्रधानमंत्री मत्स्य सम्पदा योजना का शुभ आरम्भ किया। इस योजना के साथ-साथ प्रधानमंत्री ने ई-गोपाल एप भी शुरू किया जो किसानों के सीधे इस्तेमाल के लिए एक बेहतरीन सुविधा और बाजार एवं सुचना पोर्टल है। समुंद्री क्षेत्रों से नाता रखने वाले और जलीय कृषि का काम करने वाले लोग योजना के माध्यम से काफी कम ब्याज दर पर लोन ले सकते है। इसके अलावा समुंद्री तूफान, बाढ़, चक्रवात जैसी प्राकृतिक आपदा की वजह से मछुआरों को होने वाले नुकसान की भरपाई भी इस योजना के माध्यम से की जाएगी।

इस योजना के माध्यम से मछली पालन, व्यवसाय से जुड़े हुए लोगों की आय में वृद्धि के साथ ही उनके जीवन स्तर में सुधार होगा। इस योजना के माध्यम से केंद्र के साथ-साथ कई राज्य सरकारों के साथ मिलकर मत्स्य पालन का व्यवसाय करने वाले किसानों को 40% से 60% सब्सिडी का लाभ भी प्रदान किया जाता है जिसके ज़रिए किसान अच्छी कमाई कर सकते है। पीएम एमएसवाई योजना के अंतर्गत सरकार द्वारा मछली पालन के क्षेत्र में कार्य करने वाले लोगों को 3 लाख रूपए का ऋण प्रदान किया जा रहा है।

प्रधानमंत्री मत्स्य सम्पदा योजना के लिए बजट में 20,050 करोड़ रूपए का फंड बनाया गया है। इस धनराशि का उपयोग इंफ्रास्ट्रक्चर को बेहतर बनाने के लिए किया जाएगा, जिससे इस क्षेत्र में रोज़गार के अवसर बढ़ेंगे। इस योजना के माध्यम से 2019 में भारत में हुए 137.58 लाख मेट्रिक टन मछली के उत्पादन को वर्ष 2024-25 तक 220 लाख मेट्रिक टन करने का लक्ष्य रखा गया है। मत्स्य पालन उत्पादकता को आज के समय में 3 टन से बढ़ाकर 5 टन प्रति हेक्टेयर करने का प्रावधान है।

प्रधानमंत्री मत्स्य सम्पदा योजना की विशेषता और लाभ

केंद्र सरकार द्वारा संचालित पीएम एमएसवाई योजना पालन के क्षेत्र में अब तक की सबसे बड़ी योजना है। इस योजना को शुरू करने का मुख्य उद्देश्य देश में मछली पालन को बढ़ावा देना है। इसके अंतर्गत मछली की गुणवत्ता पर विशेष ध्यान दिया जाएगा साथ ही मत्स्य पालन करने वाले लोगों को जिला स्तर पर विभाग द्वारा निशुल्क प्रशिक्षण दिया जाएगा। देश के अधिकांश राज्यों में मछलियों की मांग बहुत अधिक है। ऐसे में अगर इन क्षेत्र को अधिक विकसित करने के साथ उन्नत बनाने पर ध्यान दिया जाए तो रोज़गार के अवसरों में काफी वृद्धि होगी।

इस योजना का मुख्य उद्देश्य मत्स्य पालन के क्षेत्र को अधिक विकसित करना है। नीली क्रांति योजना की उपलब्धियों को सशक्त बनाने के उद्देश्य से कई नए हस्तक्षेपों की परिकल्पना की गई है। मछुआरों के आर्थिक नुकसान की भरपाई और उनकी आय को दोगुना करने के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना को शुरू किया गया। साथ ही मछली पालन में संभावनाओं को देखते हुए इसे बढ़ावा देना भी इस योजना का मुख्य उद्देश्य है। आने वाले 4-5 साल में इसकी मदत से और 70 लाख टन मछली का उत्पादन किया जाएगा।

मछली पालने वाली योजना का लाभ लेकर 3 लाख रूपए तक का लोन बेहद ही काम दर पर ले सकते है। अगर समय पर लोन का भुक्तान किया जाए तो ब्याज पर भी छूट देने का प्रावधान है। क्रेडिट कार्ड के माध्यम से झींगा मछलियों के पालन के लिए भी क़र्ज़ लिया जा सकता है। इस योजना के माध्यम से करीब 55 लाख लोगों को रोज़गार दिया जाएगा। वही केंद्र सरकार ने इस योजना के लिए 20,050 करोड़ रूपए का फंड निर्धारित किया है।

योजना के अंतर्गत मरीन, इनलैंड पिशरीड और एक्वाकल्चर के लिए 12,340 करोड़ रूपए और फिशरीज इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए करीब 7,710 करोड़ रूपए का निवेश प्रस्तावित किया गया है। योजना के माध्यम से फिशर, मछली किसान, मछली श्रमिक और मछली विक्रेता, मत्स्य विकास निगम, स्वयं सहायता समूह, मछली पालन क्षेत्र, मत्स्य पालन संघ आदि की आय में वृद्धि होगी और विकास होगा।

इस योजना के ज़रिए मछली पालन के लिए गुणवत्ता युक्त बीज हासिल करने और मछली पालन के लिए बेहतर जलीय प्रबंधन को भी बढ़ावा मिलेगा। योजना के द्वारा शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में मछली पालन से सीधे या परोक्ष रूप से जुड़े सभी लोगों के लिए रोज़गार और आय के बेहतर अवसर उपलब्ध हो सकेंगे। मछली पालन क्षेत्र में निवेश को बढ़ावा देने में भी मदत मिलेगी जिससे मछली उत्पादक बाजार में और ज़्यादा प्रतिस्पर्धी बन सकेंगे।

प्रधानमंत्री मत्स्य सम्पदा योजना में ऑनलाइन आवेदन करने के लिए सबसे पहले ऑफिसियल वेबसाइट पर जा कर होम पेज से स्कीम में पीएम एमएसवाई योजना के पेज को खोलना होगा। जहाँ Booklet of PM matsya sampada yojna पर जा कर इस योजना का फॉर्म मिलेगा जिसमें मांगी गई जानकारी भरने और दस्तावेज जोड़ने के बाद फॉर्म को जमा कर देना है और इस योजना में आवेदन की प्रक्रिया पूरी हो जाएगी।

इस योजना में आवेदन के लिए आवेदक का भारत का स्थाई नागरिक होना अनिवार्य है। इस योजना का लाभ लेने के लिए देश के सभी मत्स्य पालक और किसान आवेदन कर सकते है। इस योजना के अंतर्गत प्राकृतिक आपदा से पीड़ित लोगों को भी लाभ प्रदान किया जाएगा। प्रधानमंत्री मत्स्य सम्पदा योजना में आवेदन के लिए आवेदक के पास आधार कार्ड, मछली पालन कार्ड, निवास प्रमाण पात्र, मोबाइल नंबर, बैंक खाते का विवरण और आवेदक का जाती प्रमाण पात्र होना आवश्यक है।

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