क्या है प्रधानमंत्री उदय योजना? यह योजना कैसे देगी अवैध कॉलोनियों के निवासियों को फायदा?

विद्युत वितरण करने वाली कंपनी की आर्थिक स्थिति में सुधार करने के उद्देश्य से आरंभ की गई है
क्या है प्रधानमंत्री उदय योजना? यह योजना कैसे देगी अवैध कॉलोनियों के निवासियों को फायदा?
क्या है प्रधानमंत्री उदय योजना? यह योजना कैसे देगी अवैध कॉलोनियों के निवासियों को फायदा?

किसी भी राज्य के स्वामित्व वाली बिजली वितरण कंपनियों के परिचालन और वित्तीय बदलाव के लिए भारत सरकार के तहत उदय योजना 15 नवंबर, 2015 को शुरू किया गया था। यह योजना सभी को सस्ती और सुलभ 24×7 बिजली प्रदान करने के उद्देश्य से स्थापित किया गया था। साथ ही इस योजना के उद्देश्य में राजस्व-पक्ष दक्षता के साथ-साथ लागत-पक्ष दक्षता का समाधान प्रदान करना शामिल है। सरकार की उदय योजना एक वित्तीय पुनर्गठन और दक्षता बढ़ाने वाला कार्यक्रम है जिसका उद्देश्य राज्य के स्वामित्व वाली बिजली वितरण कंपनियों के ऋण के बोझ को कम करना है। उनमें से ज़्यादातर राज्य सरकारों के स्वामित्व में हैं, लगभग 3.8 लाख करोड़ रूपए का संचित घाटा और लगभग 4.3 लाख करोड़ रूपए का बकाया ऋण है। उदय को 1,380 करोड़ रूपए का फायदा होगा। यह योजना राज्य सरकार के स्वामित्व वाली बिजली कंपनियों पर लागू होगी। इसके तहत झारखंड सरकार बिजली कंपनियों के बकाया दायित्वों को टेकओवर करेगी। टेकओवर की गई ऋण राशि को केंद्र सरकार एफ.आर.बी.एम लिमिट से बाहर रखेगी। राज्य के राजकोष घाटे की गणना में इसे शामिल नहीं किया जाएगा। इसका लाभ यह होगा कि राज्य के विकास की प्राथमिकता वाले क्षेत्रों पर किसी भी तरह का प्रतिकूल वित्तीय प्रभाव नहीं पड़ेगा।

क्या है उदय योजना?

भारत सरकार द्वारा उदय योजना भारत की विद्युत वितरण करने वाली कंपनी की आर्थिक स्थिति में सुधार करने के उद्देश्य से आरंभ की गई है। इस योजना को 5 नवंबर, 2015 को आरंभ किया गया था। उदय योजना के माध्यम से राज्य एवं केंद्र शासित प्रदेशों के घाटे में चल रही विद्युत कंपनी को घाटे से उभारा जाएगा और उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार किया जाएगा। इस योजना का संचालन-विद्युत मंत्रालय के माध्यम से किया जाएगा। इसके अलावा उदय योजना से देश के लोगों तक 24 घंटे एवं सुविधाजनक विद्युत वितरण सुनिश्चित करने का प्रयास किया जाएगा। यह योजना ग्रामीण क्षेत्रों में विद्युतीकरण भी करेगी। हिमाचल प्रदेश, मध्य प्रदेश, उत्तराखंड, गुजरात, जम्मू कश्मीर, झारखंड, हरियाणा,राजस्थान, छत्तीसगढ़ समेत 15 राज्यों में इस योजना का संचालन किया जा रहा है। उज्ज्वल डिस्कॉम एश्योरेंस योजना भारत की बिजली वितरण कंपनियों के लिए वित्तीय बदलाव और पुनरुद्धार पैकेज है, जो भारत सरकार द्वारा वित्तीय गड़-बड़ी का स्थायी समाधान खोजने के इरादे से शुरू की गई है। जिसमें बिजली वितरण है और यह एक वित्तीय पुनर्गठन और दक्षता बढ़ाने वाला कार्यक्रम है। इस योजना का लक्ष्य देश की विद्युत वितरण कंपनियों की वित्तीय स्थिति में सुधार एवं उनका पुनरुद्धार करना और उनकी परेशानी का समाधान सुनिश्चित करना है। 2015 में उदय योजना लागू होने के बाद साल 2016 में डिस्कॉम्स का घाटा 51,562 करोड़ रूपए था जबकि साल 2018 में यह घाटा 15,132 करोड़ रूपए रह गया। और साल 2019 के सितंबर महीने तक यह घाटा 28,036 करोड़ रूपए हो गया। 28 राज्यों में से केवल 7 राज्य ही कुल तकनीकी तथा वाणिज्यिक अर्थात Aggregate Technical and Commercial AT&C नुकसान में कमी के लक्ष्य को प्राप्त कर सकते हैं। हालाँकि इस योजना का सकारात्मक पक्ष है कि देश के 28 राज्यों ने उदय योजना को लागू किया लेकिन वित्तीय वर्ष 2019 में केवल 10 राज्यों ने इस घाटे में कमी की है और लाभ प्राप्त किया है। इसके अलावा अन्य राज्य भी आपूर्ति लागत और औसत राजस्व प्राप्ति अंतर को कम करने में सफल रहे हैं लेकिन वह निर्धारित लक्ष्यों से काफी पीछे है।

योजना का उद्देश्य और लाभ

उदय योजना का मुख्य उद्देश्य विद्युत वितरण करने वाली कंपनियों की आर्थिक स्थिति में सुधार करना है। इस योजना के संचालन से घाटे में चल रही विद्युत कंपनी की आर्थिक स्थिति में सुधार किया जाएगा एवं उनके ऋण का भी भुगतान किया जाएगा। जिससे की बिजली उत्पादन की लागत में कमी आ सके। यह उदय योजना विद्युत कंपनी को ट्रांसमिशन व वितरण की हानि को सुधारने में मदत करेगी। इसके अलावा विद्युत कंपनी की आर्थिक स्थिति में सुधार होने के बाद यह कंपनियां ज़्यादा बिजली खरीद सकेंगे। जिससे की बिजली कटौती में सुधार आएगा। यह योजना देश में बिजली कम दर में उपलब्ध करवाने में कारगर साबित होगी। इस योजना के लक्ष्य 2018-19 तक राजस्व-पक्ष आपूर्ति और लागत-पक्ष आपूर्ति के बीच के अंतर को खतम करने के साथ-साथ औसत तकनीकी और वाणिज्यिक नुकसान को लगभग 22% से 15% तक कम करना है। अनिवार्य स्मार्ट मीटरिंग, ट्रांसफॉर्म मीटर आदि के लिए उन्नयन के माध्यम से परिचालन दक्षता में सुधार लाना, साथ ही कुशल एलईडी बल्ब, कृषि पंप ऊर्जा दक्षता उपायों को अपनाने की पहल की जाएगी। वितरण क्षेत्र में बिजली की हानि के साथ-साथ सस्ती दरों पर पर्याप्त बिजली की आपूर्ति के लिए DISCOMs की परिचालन दक्षता में सुधार करना इस योजना का हिस्सा है। इस योजना के लाभ में केंद्रीय सहायता के माध्यम से बिजली की लागत में कमी घरेलू कोयले की आपूर्ति में वृद्धि, अधिसूचित कीमतों पर कोयला लिंकेज का आवंटन, कोयले की कीमत युक्ति करण कोल लिंकेज को युक्तिसंगत बनाना और कोल स्वैप की अनुमति देना, घुले और कुचले हुए कोयले की आपूर्ति, अधिसूचित कीमतों पर ज़्यादा कोयला, अंतर-राज्यीय पारेषण लाइनों का तेज़ी से पूरा होना और पारदर्शी प्रस्तिस्पर्थी बोली के माध्यम से बिजली खरीद शामिल है।

उदय योजना राज्यों पर बिजली वितरण कंपनियों पर क़वाए 4,50,000 करोड़ रूपए का 90% बकाया है। यह देश के बिजली क्षेत्र में सुधार के लिए उठाया गया अभी तक का सबसे बड़ा कदम होगा। उदय योजना के लागू होने के बाद बिजली वितरण कंपनियों को नए सिरे से क़र्ज़ मिलना शुरू होगा जिससे वह अपनी ट्रांसमिशन व वितरण की हानि को दूर करने के लिए नई योजना बना सकेगी। बेहतर स्थिति होने के बाद वह ज़्यादा बिजली खरीदेंगी जिससे देश में बिजली कटौती नहीं होंगी। बिजली वितरण कंपनियों को सीधे तौर पर फायदा होगा और अनिश्चितता में फंसी नई बिजली कंपनियों पर काम आगे बढ़ सकेगा। इस तरह से उदय योजना से देश में ज़्यादा बिजली कम दर पर उपलब्ध हो सकेगी। योजना में आवेदन करने के लिए सबसे पहले उदय योजना की आधिकारिक वेबसाइट पर जाना होगा जहाँ होम पेज पर आवेदन करने के विकल्प पर क्लिक करना होगा। उसके बाद पंजीकरण फॉर्म खुल जाएगा जिसमें पूछी गई सभी महत्वपूर्ण जानकारी भरनी होगी। फॉर्म के साथ महत्वपूर्ण दस्तावेज़ जमा करने होंगे। उसके बाद सबमिट के विकल्प पर क्लिक करना होगा और आवेदन करने की प्रक्रिया पूरी हो जाएगी।

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