क्या दिमाग को तेज किया जा सकता है? विज्ञान क्या कहता है, जानिए...

जब मनुष्य की उम्र बढ़ती है तो शरीर न्यूरोडीजेनेरेशन की प्रक्रिया को अंजाम देता है। इसी प्रक्रिया से मस्तिष्क संबंधित कई बीमारियों का भी जन्म होता है।
क्या दिमाग को तेज किया जा सकता है? विज्ञान क्या कहता है, जानिए...

मुख्य बिंदु:

  • मानव शरीर चमत्कारी है, इसमें अथाह शक्तियां व्याप्त हैं; बस मनुष्य को उन शक्तियों जाग्रत करने के लिए मोटिवेशन तलाशने की ज़रुरत है।

  • उम्र बढ़ने के साथ दिमाग की कुशलता से काम करने की क्षमता कम होने लगती है।

  • यहां कुछ वैज्ञानिक तरीके बताए गए हैं जिनसे मनुष्य अपनी बौद्धिक क्षमता को बढ़ा सकता है।

मानव शरीर की कार्यप्रणाली मुख्य रूप से मस्तिष्क पर निर्भर करती है। यदि आप अपने शरीर को एक कंप्यूटर मानें, तो मस्तिष्क उसकी केंद्रीय प्रसंस्करण इकाई यानि सीपीयू(CPU) होगा। ढेर सारे डेटा और सूचनाओं को प्रोसेस करने के बाद, मस्तिष्क विभिन्न प्रासंगिक कार्यों को करने के लिए शरीर के विभिन्न हिस्सों का मार्गदर्शन करता है। हालांकि, चाहे वह मशीन हो या मानव, समय के साथ मूल्यह्रास के कारण कम दक्षता एक अनिवार्य परिणाम है। मस्तिष्क के लिए, बुढ़ापा न्यूरोडीजेनेरेशन की प्रक्रिया में योगदान देता है। लेकिन क्या हमारे मस्तिष्क के कॉन्फ़िगरेशन को उन्नत करने का कोई तरीका है? एक तरह से कहा जाए तो इसका जवाब है- हाँ।

तो आइये दिमाग तेज करने के विज्ञान द्वारा सर्टिफाइड उपाय जान लेते हैं

कहीं आप सोच रहे हों कि Microsoft या Apple मानव मस्तिष्क के लिए अपग्रेडेड प्रोसेसर तैयार कर दिया है, तो ऐसा बिलकुल भी नहीं है। यह एक ऐसा काम है जिसे आपको खुद ही करना होगा। यहां कुछ तरीके दिए गए हैं जिनसे आप किसी भी उम्र में अपने दिमाग को तेज़ कर सकते हैं:

1.ऐसे खेल खेलें जिनसे दिमाग पर जोर लगे:

सीखने के अपने शुरुआती चरणों के दौरान, बच्चों से अक्सर पहेली और समस्याओं को हल करवाया जाता है। यह उनकी ज्ञान संबंधी विकास प्रक्रिया का एक अनिवार्य हिस्सा है। हालांकि, विज्ञान की सलाह है कि मस्तिष्क की कार्यप्रणाली में सुधार की प्रक्रिया जीवन के बाद के चरणों में भी की जानी चाहिए। अध्ययनों ने सुझाव दिया है कि मस्तिष्क के खेल जैसे पहेली, कार्ड गेम, क्विज़, और बहुत कुछ मस्तिष्क को व्यस्त रखने और उसके व्यायाम को बढ़ावा देने में मदद कर सकते हैं। ब्रेन गेम विश्लेषणात्मक कौशल, स्मृति, रचनात्मकता और सोच को भी बढ़ा सकते हैं।

2.नई भाषा सीखें:

यदि आप कम से कम दो भाषाएं धाराप्रवाह बोल सकते हैं तो, बधाई हो! आपकी ये क्वालिटी लंबे समय तक आपके मस्तिष्क को लाभ पहुंचाएगी। कई अध्ययन संज्ञानात्मक कार्य को बेहतर बनाने में द्विभाषावाद के लाभों का समर्थन करते हैं। पबमेड सेंट्रल में प्रकाशित एक समीक्षा के अनुसार "द्विभाषी होने के संज्ञानात्मक लाभ", बिलिंगुअल होना रचनात्मकता, सीखने के कौशल और स्मृति को बढ़ावा देने में मदद कर सकता है। यह उम्र से संबंधित संज्ञानात्मक गिरावट के जोखिम को भी कम करता है।

3.कोई वाद्य यंत्र बजाना या संगीत सीखें:

क्या आपने कभी सोचा है कि पियानो बजाने वाला इतनी प्रभावशाली गति से जटिल नोट्स कैसे बजा लेते हैं या गिटार बजाने वाले एक ही समय में स्ट्रम एंड पिक कैसे कर लेते हैं? इसका जवाब उनके दिमाग में है। PLOS ONE में प्रकाशित एक अध्ययन 'हैप्पी क्रिएटिविटी' के अनुसार, हैप्पी म्यूजिक सुनने से डायवर्जेंट थिंकिंग की क्षमता बढ़ती है, इसके साथ ही यह संगीत रचनात्मकता, मनोदशा और संज्ञानात्मक कार्य क्षमता को भी बढ़ा सकता है। वाद्ययंत्र बजाना एक कौशल है और ये सीखने से मसल मेमोरी और को-आर्डिनेशन में भी सुधार होता है।

4.ध्यान करेंन (मेडिटेशन करें):

ध्यान का अभ्यास प्राचीन काल से भारतीय संस्कृति का हिस्सा रहा है। मन को शांत करने और शरीर को आराम देने की क्षमता के कारण अब इसे दुनिया भर के लोगों द्वारा अपनाया और अभ्यास किया जाता है। अध्ययनों के अनुसार, ध्यान को बेहतर सूचना प्रसंस्करण क्षमता, मानसिक स्थितियों के कम जोखिम और भावनाओं के बेहतर प्रसंस्करण के साथ जोड़ा गया है।

5.अपनी सभी इंद्रियों का उपयोग करें:

क्या कभी किसी विशिष्ट गंध ने आपको अतीत के किसी पल की याद दिलाई है? यानी आपका मस्तिष्क आपको किसी घटना के गंध के साथ जुड़ाव के कारण आपके मस्तिष्क में अंकित स्मृति की याद दिलाता है। यह किसी भी चीज के साथ हो सकता है - गंध, ध्वनि या दृश्य। हार्वर्ड हेल्थ पब्लिशिंग सभी पांच इंद्रियों - सूंघने, चखने, छूने, सुनने और देखने - को गतिविधियों में शामिल करने और अपने मस्तिष्क को लगातार कसरत करने की सलाह देता है। यह मस्तिष्क को मजबूत करने और संज्ञानात्मक कार्य को बढ़ाने में बहुत योगदान दे सकता है।

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