Ashish Urmaliya || Pratinidhi Manthan
मौजूदावक्त में टेक्नोलॉजी अपने चरम पर है। और इसी टेक्नोलॉजी के चलते लगातार लोगों की प्राइवेसीको से जुड़े सवाल खड़े होते रहते हैं। आप आये दिन टीवी या न्यूज़ पेपर में डेटा लीक सेजुडी खबरें देखते-पढ़ते रहते होंगे। तो आपको बता दूं, जितनी तेज़ी से टेक्नोलॉजी आगेबढ़ रही है डाटा प्राइवेसी से जुड़ी समस्याएं भी उतनी ही तेज़ी से बढ़ रही हैं। आने वालेसमय में यह समस्या इतनी बढ़ जाएगी कि इस पर काबू पाना बेहद मुश्किल हो जायेगा। वो दिनदूर नहीं जब लड़ाइयां भौतिक संसाधनों के लिए नहीं बल्कि यूजर्स के डाटा के लिए लड़ी जाएंगी।ताकि ज्यादा से ज्यादा डेटा पर अपना कंट्रोल रखा जा सके।
10 खरब जीबी का डिजिटल यूनिवर्स-
साल2025 तक यानी करीब 6 सालों बाद दुनियाभर में हर रोज करीब 463 एक्साबाइट (Exabyte) डेटाउत्पन्न होगा। मालूम हो, कि यह एक दिन का डाटा करीब 22 करोड़ डीवीडी में स्टोर कियेजाने वाले डेटा के बराबर होता है। आने वाले कुछ सालों में ही यह 'डिजिटल यूनिवर्स'करीब 44 जेट्टाबाइट (Zettabyte) यानी करीब10 खरब जीबी का होने की संभावनाएं हैं। मीडिया साइट 'विजुअल कैपिटलिस्ट' के अनुसार,फिलहाल दुनियाभर में रोजाना करीब 50 करोड़ ट्वीट और 294 बिलियन ई-मेल किये जाते हैं।व्हाट्सएप की बात करें, तो इस मैसेजिंग प्लेटफार्म पर एक दिन में 65 बिलियन (6500 करोड़)मैसेज भेजे जाते हैं। वहीँ फेसबुक पर हर रोज करीब 4 पीटाबाइट यानी 1000TB का डेटा तैयारहोता है। इतना ही नहीं दुनियाभर में हर रोज इंटरनेट पर 5 अरब से ज्यादा सर्च किये जातेहैं।
सबका एक्के मकसद- डाटा कब्जियाना
इतनेबड़े-बड़े आंकड़ों का जिक्र हमने इसलिए किया ताकि आपको असलियत का एहसास हो सके। जब दुनियाभरकी बड़ी-बड़ी टेक कंपनियों की नजर इन आंकड़ों पर पड़ती है तो उनके दिमाग में बस एक ही ख्यालआता है, कि कैसे भी करके सारा डाटा बस उनके हाथ आ जाये। कई कंपनियां यूजर्स का ज्यादासे ज्यादा डाटा अपने कब्जे में करने की तमाम कोशिशें कर भी रही हैं और कामयाब भी हैं।फिर इस डाटा को फ़िल्टर कर के अलग-अलग कंपनियों के साथ शेयर किया जाता है और पैसे कमाएजाते है। और इसी डाटा के आधार पर 24*7 यूजर्स को विज्ञापन और प्रमोशनल कैंपेन दिखाएजाते हैं।
गूगल के अलावा फेसबुक भी हमारेबारे में सब कुछ जनता है-
हालांकिआपके फ़ोन में जितने एप हैं उन सभी के पास आपकी कुछ न कुछ जानकारी है लेकिन गूगल औरफेसबुक ऑनलाइन यूजर्स के मामले में दुनिया की सबसे बड़ी कंपनियां हैं। इसी साल की दूसरीतिमाही के आंकड़ों के अनुसार, फेसबुक के पास 2 अरब 41 लाख एक्टिव यूजर्स हैं। इस वक्तफेसबुक दुनिया का सबसे बड़ा सोशल मीडिया प्लेटफार्म है और इंस्टाग्राम, व्हाट्सएप फेसबुककी यूजर्स तक पहुंच को और भी ज्यादा बढ़ा देते हैं। अब आप अंदाजा लगा सकते हैं की हमारीनिजी जिंदगी में फेसबुक का किस हद तक दखल है। वहीँ गूगल की बात करें, तो गूगल के पासदुनिया भर के सर्च इंजन मार्केट का 90 फीसदी हिस्सा है। गूगल के स्वामित्व वाले वीडियोप्लेटफार्म 'यूट्यूब' पर एक महीने में करीब 100 करोड़ से ज्यादा यूजर लैंड करते हैं,वहीँ जीमेल के पास भी 150 करोड़ से ज्यादा एक्टिव ग्राहक हैं।
लगातार बढ़ता ही जा रहा है ऐडरेवेन्यू-
हालही में वर्ल्ड एडवरटाइजिंग रिसर्च सेंटर द्वारा एक रिपोर्ट जारी की गई थी जिसमें बतायागया था, कि इस साल गूगल और फेसबुक का ऑनलाइन ऐड मार्केट शेयर बढ़कर 61.4 प्रतिशत काहो जायेगा, जो कि पिछले साल 56.4 प्रतिशत था। इसी साल 2019 की दूसरी तिमाही में फेसबुककी विज्ञापन आय 16.62 बिलियन डॉलर और गूगल की विज्ञापन आय 2.6 बिलियन डॉलर थी। एक ई-मार्केटनामक रिसर्च फर्म के अनुसार, दुनियाभर में डिजिटल विज्ञापन पर होने वाला खर्च इस साल 333.25 बिलियन डॉलर तक पहुंच जाएगा।
प्राइवेसी शब्द सिर्फ एक ढोंग-
आजट्विटर, फेसबुक, स्नैपचैट, इंस्टाग्राम, व्हाट्सएप आदि पर दुनियाभर के अरबों यूजर्सअपनी फीलिंग्स, इमोशंस शेयर करते हैं। जिसे विज्ञापन दाता अपने भविष्य के मार्केट केतौर पर देख रहे हैं। आज सोशल मीडिया कंपनियों का सबसे बड़ा काम ये समझना है कि आप क्यासोच रहे हैं, क्या देख रहे हैं, क्या महसूस कर रहे हैं, और कैसी प्रतिक्रिया दे रहेहैं। इन्हीं सब इमोशंस को डिकोड करके कंपनियां आपको ऐड दिखाने का काम करती हैं। सीधेतौर पर इसे यूजर की प्राइवेसी में दखलंदाजी कहा जा सकता है। यूजर्स के पोस्ट और उनकेरिएक्शंस को देखते हुए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के जरिये अहम् डेटा पॉइंट्स को फ़िल्टरकिया जा सकता है। रियल टाइम एनालिटिक्स और एल्गोरिदम के जरिए सोशल मीडिया से निकालागया यह डेटा कंपनियों और मार्केटर्स को उम्मीद से भी ज्यादा पैसे कमा कर देगा। सबसे सवाल यह है कि क्या आप अपनी आने वाली पीढ़ी को ऐसाडिजिटल भविष्य देने को तैयार हैं? जवाब मिलते ही, हमें ईमेल करके ज़रूर बताइयेगा।