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दुनिया की सबसे बड़ी व ताकतवर मानी जाने वाली ‘ईस्ट इंडिया कंपनी’ आखिर बंद कैसे हो गई?

Pramod

Ashish Urmaliya | Pratinidhi Manthan

भारत ही नहीं दुनिया में शायद ही कोई ऐसा होगा जिसने 'ईस्ट इंडिया कंपनी' (East India Company) का नाम न सुना हो। एक वक्त ऐसा भी था जब इस कंपनी को दुनिया की सबसे बड़ी व ताकतवर कंपनी माना जाता था. इस कंपनी ने भारत समेत दुनिया के एक बहुत बड़े हिस्से पर लंबे समय तक राज किया। आपको शायद ही अंदाजा हो कि इस कंपनी के पास लाखों लोगों की फौज थी। इतना ही नहीं, उसकी अपनी ही एक खुफिया एजेंसी भी थी। ईस्ट इंडिया कंपनी कंपनी की स्थापना 1600 ईस्वी यानी आज से करीब 419 साल पहले हुई थी। उस दौर में ब्रिटेन की महारानी एलिजाबेथ प्रथम ने ईस्ट इंडिया कंपनी को एशिया में कारोबार करने की खुली छूट दी थी, उस वक्त उन्हें इसका तनिक भी अंदाजा नहीं था कि यह कंपनी एक कंपनी न रहकर खुद ही सरकार बन गई। हालांकि इतना विकराल रूप धारण करने के बाद भी ईस्ट इंडिया कंपनी ब्रिटेन के शाही परिवार के आदेश पर ही काम करती रही। 

पूरा एशिया कब्जे में था-

एक दौर ऐसा भी आया था जब एशिया के लगभग सभी देशों पर ईस्ट इंडिया कंपनी का ही कब्ज़ा था। सिर्फ एशिया ही नहीं बल्कि यूरोप में भी इस कंपनी का भयंकर दबदबा था। विभिन्न किताबों में लिखी जानकारी के अनुसार, भारत में इस कंपनी के पास ढाई लाख से भी ज्यादा लोगों की फौज थी, जिसकी दम पर उसने सालों तक भारत पर हुकूमत की। 

एक ओर आज का समय है जब कोई भी इंसान बिना पैसे के किसी के लिए एक कदम भी नहीं बढ़ता, वहीं दूसरी ओर ईस्ट इंडिया कंपनी में लोगों ने अपने करियर की शुरुआत बिना सैलरी के ही की थी. वो भी कोई छोटा-मोटा वक्त नहीं पूरे 5 साल। हालांकि 1778 ईस्वी में इस समय (कॉन्ट्रैक्ट) को घटाकर तीन साल कर दिया गया था. कंपनी की पॉलिसी के अनुसार जब लोग नौकरी करते हुए 3 साल का वक्त पूरा कर लेते थे तब कंपनी उन्हें दस पाउंड का मेहनताना देना शुरू करती थी। हालांकि उस दौर में इतने पैसे बहुत हुआ करते थे।

प्रतिष्ठित मीडिया संस्थान बीबीसी की एक रिपोर्ट के मुताबिक, ईस्ट इंडिया कंपनी में काम करने वालों को तीन साल तक भले की कोई पगार नहीं मिलती थी लेकिन उन्हें कई तरह की सुविधाएं भी मिलती थीं। जैसे कि उन्हें नाश्ता व खाना दिया जाता था। इसके अलावा कंपनी के इंग्लैंड के बाहर अन्य देशों में जितने भी दफ्तर थे उनमें काम करने वाले कर्मचारियों को खाने के साथ रहने की सुविधा भी मिलती थी। हालांकि बाद में खर्च में कटौती की गई और नाश्ते या खाने की सुविधा 1834 ईस्वी में बंद कर दी गई थी। 

झांसी की रानी महारानी लक्ष्मी बाई और मंगल पाण्डेय के नेतृत्व में 1857 ईस्वी में भारत में प्रथम भारतीय स्वतंत्रता संग्राम हुआ था, जिसे भारतीय विद्रोह के नाम से भी जाना जाता है। इस क्रांति के बाद ही ईस्ट इंडिया कंपनी का बुरा दौर शुरू हो गया था। जैसे-तैसे करके कंपनी कुछ दिन और चली, लेकिन 1874 में ब्रिटिश सरकार ने कंपनी को पूरी तरह से बंद कर दिया था और उसके बाद 1858 ईस्वी से भारत में ब्रिटिश राज की शुरुआत हुई। तो ये थी ईस्ट इंडिया कंपनी की संक्षिप्त कहानी।  

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