विश्व बाल श्रम निषेध दिवस के अवसर पर कार्यशाला का अयोजन किया गया।

बाल मजदूरी के प्रति विरोध एवं जगरूकता फैलाना है-:श्रीमती जँहा
विश्व बाल श्रम निषेध दिवस के अवसर पर कार्यशाला का अयोजन किया गया।
विश्व बाल श्रम निषेध दिवस के अवसर पर कार्यशाला का अयोजन किया गया।

दतिय| राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण नई दिल्ली एवं मध्य प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण जबलपुर के निर्देशानुसार एवं प्रभारी प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश एवं अध्यक्ष महोदय श्री मधुसूदन मिश्रा जी के निर्देशानुसार एवं श्री मुकेश रावत जिला जज एवं सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण दतिया के मार्गदर्शन में आज दिनांक: 12 जून 2022 को जिला विधिक सेवा प्राधिकरण दतिया एवं श्रम विभाग के संयुक्त तत्वाधान में विश्व बाल श्रम निषेध दिवस के अवसर पर शासकीय कन्या विद्यालय नम्बर 01 स्कूल दतिया में विधिक जागरूकता एवं साक्षरता शिविर का आयोजन किया गया।

श्रीमती निशा जहाँ लेवर इंस्पेक्टर दतिया द्वारा जानकारी देते हुए बताया कि हम प्रतिवर्ष 12 जून को विश्व बाल श्रम निषेध दिवस मनाते आ रहे हैं,इसका मुख्य उद्देश्य यह कि प्रत्येक व्यक्ति को जागरूक करना, हमें कम से कम एक बच्चे को बाल श्रम मुक्त बनाना है और शिक्षा के प्रति जागरूक करना है,बाल मजदूरी के प्रति विरोध एवं जगरूकता फैलाने के मकसद से हर साल 12 जून को बाल श्रम निषेध दिवस मनाया जाता है। अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन के जागरूकता पैदा करने के लिए 2002 में विश्व बाल श्रम विरोधी दिवस के रूप में मनाने की शुरूआत की। संगठन के अनुमान के मुताबिक विश्व में 21 करोड़ 80 लाख बालश्रमिक हैं।जबकि एक आकलन के अनुसार भारत में ये आंकड़ा 1 करोड, 26 लाख 66 हजार 377 को छूता है।

10 अक्टूबर 2006 तक बालश्रम को इस असमंजस में रखा गया, कि किसे खतरनाक और किसे गैर खतरनाक बाल श्रम की श्रेणी में रखा जाए। उसके बाद इस अधि‍‍नियम 1986 में संशोधन कर ढाबों, घरों, होटलों में बालश्रम करवाने को दंडनीय अपराध की श्रेणी में रखा गया।हमे कही भी कोई अभी बच्चा आपत्तिजनक हालत में मिले तो आप श्रम विभाग के कार्यालय में आकर सम्पर्क कर सकते है।

श्री संतोष उपाध्या पीएलव्ही जिला विधिक सेवा प्राधिकरण दतिया द्वारा जानकारी देते हुते बताया कि भारतीय संविधान में मौलिक अधि‍कारों और नीति निर्देशों के अनुसार धारा 24 में कहा गया कि 14 साल से कम उम्र का कोई भी बच्चा किसी फैक्ट्री या खदान में कार्य करने के लिए नियुक्त नहीं किया जाएगा और ना ही किसी खतरनाक नियोजन में नियुक्त किया जाएगा।धारा 39-ई - राज्य अपनी नीतियां इस तरह निर्धारित करे कि श्रमिकों, पुरूषों और महिलाओं का स्वास्थ्य तथा उनकी क्षमता सुरक्ष‍ित रह सकें, बच्चों की कम उम्र का शोषण न हो, न ही वे अपनी उम्र और शक्ति के प्रतिकूल, आर्थ‍िक आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए प्रवेश करें ।बच्चों को स्वस्थ्, स्वतंत्र व सम्मानजनक स्थिति में विकास के अवसर व सुविधाएं दी जाएंगी और बचपन व युवावस्था के नैतिक व भौतिक दुरूपयोग से बचाया जाएगा।संविधान लागू होने के 10 साल के भीतर राज्य 14 वर्ष तक की उम्र के सभी बच्चों को मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा देने का प्रयास करेंगे।

श्री सोमेश सिंह चाइल्ड लाइन द्वारा बताया कि बालश्रम के लिए कानून बालश्रम निषेध व नियमन कानून 1986 - इस कानून के अनुसार 14 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के जीवन और स्वास्थ्य के लिए बनाया गया है,यसे कई कानून बनाये गए है,पोक्सो एक्ट 2012 आदि हमे बच्चों के जीवन के साथ खिलवाड़ नही करना चाइए,यदि कोई बच्चा मजदूरी करता मिले तो 1098 पर कॉल करके सूचित कर सकते है,सूचना देने बाले का नाम गोपनीय रखा जाएगा।

साथ ही बाल श्रम निषेध दिवस के अवसर पर रैली का भी आयोजन किया गया जो शासकीय कन्या विद्यालय न0 01 से प्रारंभ होकर मंडी से होती हुए किला चौक पर समाप्त हुई।इसी के बीच श्रम विभाग के अधिकारियों द्वारा दुकान दार एवं ठेले बालो को निर्देश दिए कि कोई भी व्यापारी बालको से मजदूरी नही कराएगा यदि शिकायत मिलने पर पाए गए तो वैधायनिक कार्यवाही की जाएगी।

उक्त कार्यशाला का संचालन श्री रामेश्वर प्रसाद श्रीवास्तव एवं आभार प्रदर्शन श्री वीरेंद्र कुमार बुधौलिया द्वारा किया गया।

उक्त कार्यशाला में, श्री सुनील त्यागी (डीएलएसए),सुश्री दीक्षा दाँगी लेवर इंस्पेक्टर,सत्येन्द्र दिसोरिया,तमन्य मिश्रा,अजीत सिंह,ऋतुराज यादव,रीना श्रीवास्तव,मोहन सिंह राजपूत,वृजेश ओझा,सहित समस्त शिक्षकगण, श्रम विभाग स्टाफ, चाइल्डलाइन स्टाफ,जिला विधिक सेवा प्राधिकरण स्टाफ उपस्थित रहा।

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