देश के दिग्गज बिज़नेसमेन रतन टाटा सिंगल क्यों हैं? उन्होंने शादी क्यों नहीं की? असली वजह यहां है

देश के दिग्गज बिज़नेसमेन रतन टाटा सिंगल क्यों हैं? उन्होंने शादी क्यों नहीं की? असली वजह यहां है

यहां हम आपको उस कारण के बारे में बताने जा रहे हैं जिसकी वजह से रतन टाटा अभी भी अविवाहित हैं।

इसमें कोई संदेह नहीं कि रतन टाटा भारत के सबसे प्रतिष्ठित एवं लोकप्रिय उद्योगपति हैं। भले ही वह मुकेश अंबानी जितने अमीर न हों लेकिन टाटा का नाम देश के किसी भी कॉरपोरेट घराने से कहीं ज्यादा प्रभावी है। इसके पीछे की बड़ी वजह निःसंदेह टाटा की विरासत और खुद रतन टाटा हैं।

आप सड़क पर चलने वाले किसी व्यक्ति से पूछेंगे तो प्रबल संभावना है कि वे परोपकारी कार्यों के लिए टाटा का नाम जानते होंगे। दुनिया भर में टाटा समूह की पहुंच का विस्तार करने वाले रतन टाटा शायद इस विरासत के बारे में किसी और से ज्यादा जागरूक हैं। वह विनम्र, मृदुभाषी और हर पैमाने पर एक सज्जन व्यक्ति हैं।

टाटा संस (Tata Sons) के अध्यक्ष का पद छोड़ने के बाद, रतन टाटा ने एमेरिटस अध्यक्ष के रूप में काम करना जारी रखा। हालांकि यह संभावित है कि रतन टाटा अपने परिवार के नाम पर टाटा समूह के अध्यक्ष के रूप में सेवा करने वाले अंतिम टाटा हो सकते हैं। अपने गुरु जे.आर.डी. टाटा (Jehangir Ratanji Dadabhoy Tata ) की तरह रतन टाटा की भी कोई संतान नहीं है। दरअसल रतन टाटा की शादी ही नहीं हुई है।

रतन टाटा का नाम उनके दादा रतनजी टाटा के नाम पर रखा गया है। उनके पिता, नवल टाटा को रतनजी और उनकी पहली पत्नी सूनू ने एक अनाथालय से गोद लिया था। तलाक से पहले उनका एक दूसरा बेटा, जिमी था। फिर नवल ने एक स्विस लड़की सिमोन से शादी की, जिनका भारत आना जाना लगा रहता था। नोएल टाटा सिमोन और नवल टाटा के बेटे हैं और अन्य व्यवसायों के अलावा, ट्रेंट चलाते हैं।

जब उनका तलाक हुआ तब रतन टाटा सिर्फ दस साल के थे। कहने की जरूरत नहीं है कि माता-पिता के तलाक का उन पर कैसा गंभीर असर था। ह्यूमन्स ऑफ बॉम्बे के साथ एक साक्षात्कार में, रतन टाटा ने याद किया कि उनकी दादी ने इस कठिन समय में उनकी मदद की थी। उनकी दादी ने उन्हें अपना सिर ऊंचा रखना, तानों और धमकियों को नजरअंदाज करना सिखाया, जो उन्हें तलाक के चलते झेलना पड़ा था, 40 के दशक में तलाक बहुत बड़ी बात हुआ करती थी। समय के साथ वह अपनी दादी के करीब हो गए जिन्होंने उन्हें कठोर या उतावले हुए बिना अपने विश्वासों के लिए खड़े होना सिखाया।

रतन टाटा ने अपनी दादी को कॉर्नेल यूनिवर्सिटी तक पहुंचाने का श्रेय दिया। उन्होंने एक बार HOB को बताया था कि उनके पिता चाहते थे कि वह यूके में पढ़ाई करें जबकि वह यूएस की कॉर्नेल यूनिवर्सिटी जाना चाहते थे। वह अपनी ज़िद पर अड़े रहे और अपनी इच्छा पूरी की। आखिरकार, अपने पिता की निराशा के कारण, उन्होंने इंजीनियरिंग से वास्तुकला की ओर भी रुख किया। यह सब उनकी गरिमा को बनाए रखने के लिए किया।

अपनी स्नातक की पढ़ाई पूरी करने के बाद, रतन टाटा ने लॉस एंजिल्स में नौकरी की, जहां उन्होंने दो साल तक काम किया। "यह एक अच्छा समय था," उन्होंने अमेरिका में अपने वर्षों को याद करते हुए एक इंटरव्यू में एचओबी(HOB) को बताया, "मौसम सुंदर था, मेरे पास अपनी कार थी और मुझे अपनी नौकरी से प्यार था। यह सब लॉस एंजेलेस में था उसी दौरान मुझे प्यार हो गया था और लगभग शादी ही कर ली थी। लेकिन साथ ही मैंने कम से कम अस्थायी रूप से वापस जाने का फैसला किया था क्योंकि मैं अपनी दादी से लगभग सात वर्षों से दूर था, जो मेरे लिए अच्छा नहीं था।" और इसलिए उन्होंने भारत लौटने का फैसला किया। उन्हें उम्मीद थी कि उनकी तत्कालीन प्रेमिका उनका साथ देगी। "लेकिन 1962 के भारत-चीन युद्ध के कारण, प्रेमिका के माता-पिता उसके इस फैसले को ले कर तैयार नहीं थे और इस तरह रिश्ता टूट गया।"

समय के साथ रतन टाटा TATA Group के प्रमुख बने और अपने पूर्ववर्ती JRD की तुलना में इसे और भी अधिक ऊंचाइयों पर ले गए। जीवन, जैसा था, वैसा ही रहा और रतन टाटा ने कभी शादी नहीं की।

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