2018 में किसानों से ज्यादा बेरोजगारों की आत्महत्या- NCRB

2018 में किसानों से ज्यादा बेरोजगारों की आत्महत्या- NCRB

Ashish Urmaliya ||Pratinidhi Manthan

साल 2018 में 12,936 लोगों नेबेरोजगारी से तंग आकर आत्महत्या कर ली थी।

नेशनलक्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) की नई रिपोर्ट में देश में हुई आत्महत्याओं(Suicides) को लेकर चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। NCRB की रिपोर्ट के मुताबिक, साल2018 में बेरोजगारी (Unemployment) के चलते होने वाली आत्महत्याओं ने किसानों की आत्महत्याओंको भी पीछे छोड़ दिया है।

2018में बेरोजगारी के तंग आकर कुल 12,936 लोगों ने आत्महत्या कर ली थी। इसी साल किसान आत्महत्याके आंकड़ों को देखें तो 10,349 किसानों ने खुदखुशी की थी।

होममिनिस्ट्री के अंतर्गत काम करने वाली संस्था NationalCrime Records Bureau (NCRB) ने हाल ही में अपराध से जुड़े कुछ आंकड़े पेश किए हैं,जो काफी हैरान करने वाले हैं। आंकड़ों के मुताबिक,

–साल 2018 में खुदखुशी के मामलों में 3.6 फीसदी की बढ़ोत्तरी हुई है।

–साल 2018 में 1 लाख 34 हजार 516 आत्महत्या के मामले दर्ज किये गए थे जबकि साल 2017में 1 लाख 29   हजार 887 लोगों ने आत्महत्याकी थी।

–साल 2017 में बेरोजगारी से तंग आकर 12 हजार 241 लोगों ने आत्महत्या की थी जबकि 10,655 किसानों ने खेती में घाटे के चलते मौत को गले लगाया था।

–साल 2016 की तुलना में साल 2017 में किसानों की मौत के मामलों में कमी आई थी।

–साल 2016 में 11 हजार 379 किसानों-खेतिहर मजदूरों ने अपनी जान दे दी थी।

रिपोर्टके मुताबिक, बेरोजगारी के चलते महिलाओं से ज्यादा पुरुषों ने आत्महत्या की थी। आंकड़ोंको देखें तो करीब 82 फीसदी पुरुषों ने बेरोजगारी से तंग आकर अपनी जान दे दी। बेरोजगारीके चलते आत्महत्याओं के मामले में केरल राज्य पहले स्थान पर है। इसके बाद तमिलनाडु,महाराष्ट्र, कर्नाटक और उत्तर प्रदेश का नंबर है।

–सभी तरह की आत्महत्याओं के सबसे ज्यादा मामले महाराष्ट्र (17,972) में दर्ज किये गए।इसके बाद क्रमशः तमिलनाडु (13,896), पश्चिम बंगाल (13,255), मध्य प्रदेश (11,775) औरकर्नाटक (11,561) में।

–अकेले इन पांच बड़े राज्यों में ही 50.9 फीसदी खुदकुशी के मामले दर्ज किए गए।

लेकिनहम अपील करना चाहते हैं, कि खुद की जान दे कर बेरोजगारी से बचना कोई उचित समाधान नहींहै। आमतौर हर एक व्यक्ति को ज़िंदगी में कड़े इम्तिहानों का सामना करना पड़ता है इसकामतलब ये नहीं कि आप हार मानकर आत्महत्या कर लें। क्योंकि आत्महत्या करने वालों को अक्सरसमाज द्वारा नाकारा समझ लिया जाता है और वाकई जब एक अपाहिज व्यक्ति भी किसी तरह खुदका छोटा-मोटा रोजगार शुरू करके अपना सुखी जीवन यापन कर सकता है तो फिर बेरोजगारी केचलते आत्महत्या करने वाले क्यों नहीं? उनके पास तो शारीरिक क्षमता भी होती है। आप एकजगह फेल हो सकते हैं, दो जगह हो सकते हैं, 10 जगह हो सकते हैं लेकिन जिंदगी बहुत बड़ीहोती है और शीघ्र बदलाव भी इसका स्वभाव होता है, इसलिए व्यक्ति को थोड़ा संयम वरतनाचाहिए और वक्त के बदलने का इंतज़ार करना चाहिए, लगातार बिना हारे परिश्रम करते रहनाचाहिए।  

नकारात्म मानसिक स्थिति की चपेटमें आकर किसी भी व्यक्ति को यह कदम नहीं उठाना चाहिए।

Pratinidhi Manthan
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