पानी के लिए हर रोज 12 किलोमीटर साइकिल चलाती हैं उत्तर 24-परगना गांव की स्कूली छात्राएं

दसवीं कक्षा की पढाई करने वाली उत्तर 24-परगना गांव की छात्रा तोमा दास ने पीएम पोर्टल पर लिखा, पानी भरने की मजबूरी के चलते उनकी पढ़ाई बाधित होती है।
पानी के लिए हर रोज 12 किलोमीटर साइकिल चलाती हैं उत्तर 24-परगना गांव की स्कूली छात्राएं
Input and Image- The Telegraph Online

पश्चिम बंगाल के उत्तर 24-परगना के हंसनाबाद प्रखंड के 'हुलोरचर गांव' की अन्य लड़कियों के साथ तोमा दास (ऊपर तस्वीर में- सफेद दुपट्टे में) साइकिल पर पीने का पानी लाती हैं। इतने पानी के लिए उन्हें 12 किलोमीटर साइकिल चलानी पड़ती है।

पश्चिम बंगाल में 15 साल की स्कूली छात्रा तोमा दास अपने उत्तर 24-परगना गांव में सड़क किनारे पीएचई जलाशय से पीने का पानी घर लाने के लिए हर दिन 12 किमी साइकिल चलाती है। हंसनाबाद प्रखंड के हुलोरचर गांव में दसवीं कक्षा पढ़ने वाली तोमा ने प्रधानमंत्री के जन शिकायत पोर्टल के जरिए अपील करते हुए कहा कि पानी लाने से उनकी पढ़ाई में बाधा आ रही है। ये शिकायत जुलाई महीने के अंतिम सप्ताह में की गई थी।

छात्रा ने प्रधानमंत्री के जन शिकायत पोर्टल में दर्ज की गई अपनी शिकायत में कहा, “हर दिन, मैं 30 लीटर पानी लाती हूं, जो पांच व्यक्तियों के परिवार के लिए पर्याप्त नहीं है। कभी-कभी, हम मेहमानों को एक गिलास पानी देने से बचते हैं क्योंकि इससे हमारा मेहनत से जमा किया हुआ पानी काम हो जयेगा।"

15 वर्षीय ने आगे लिखा, "नियमित रूप से पानी भरने जाने के कारण मुझे सुबह का बहुमूल्य अध्ययन समय खर्च करना पड़ता है क्योंकि पानी लाने की प्रक्रिया में दो घंटे का समय लग जाता है। इसी के चलते कभी-कभी स्कूल जाना तक मुश्किल हो जाता है।"

दरअसल, तोमा को जब इस बात की जानकारी लगी कि उसका परिवार जिस ट्यूबवेल का पानी पीता है वह अत्यधिक खारा होने के साथ स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है तो उसने स्वेच्छा से दो प्लास्टिक के कंटेनरों में 30 लीटर पीने का पानी घर लाने का निश्चय किया। दो साल पहले तक उसके पिता राजमिस्त्री सुबोल दास स्थानीय नलकूप से घर का पानी लाते थे। फिर, वह बीमार पड़ गए थे। इसके पीछे की मुख्य वजह पानी ही था।

सुंदरबन के सामाजिक-आर्थिक विकास के लिए काम करने वाली संस्था 'मां सरोदा महिला एवं ग्रामीण कल्याण सोसायटी' की सचिव सुभासिस मंडल ने कहा, “यह (पानी में अत्यधिक लवणता) एक जबरदस्त समस्या है जिसके साथ वहां के बच्चे बड़े हो रहे हैं। लेकिन अब वे अपने माता-पिता और दादा-दादी की तरह इस समस्या के साथ जीने के लिए तैयार नहीं हैं। क्योंकि लगातार खारेपन के कारण त्वचा संबंधी कई समस्याएं होती हैं।

सूत्रों के अनुसार, हिंगलगंज प्रखंड के अंतर्गत आने वाले हंसनाबाद प्रखंड के अंतर्गत अमलानी, भवानीपुर-1, हंसनाबाद, पाटलीखानपुर, बरुणहाट, रामेश्वरपुर, भवानीपुर-द्वितीय ग्राम पंचायत, बिसपुर, दुलदुली, गोबिंदकटी, जोगेशगंज, कलीताला, रूपमारी और संदेलेरबिल जैसे क्षेत्र पानी में अत्यधिक लवणता (Salinity) से प्रभावित हैं।

स्कूली छात्रा तोमा दास, बशीरहाट अनुमंडल के हिंगलगंज और हंसनाबाद प्रखंड की 14 ग्राम पंचायतों में रहने वाले कुछ हजार लोगों में शामिल हैं, जो पीने का पानी लाने के लिए रोजाना कुछ किलोमीटर पैदल या साइकिल चलाकर जाते हैं और उनके पास कोई दूसरा विकल्प नहीं है।

बंगाल की खाड़ी से जुड़ी कई नदियों से आच्छादित, उत्तर और दक्षिण 24-परगना में फैले सुंदरबन के अधिकांश ब्लॉक उच्च भूजल लवणता से ग्रस्त हैं। हाल ही में किसी भी ब्लॉक ने प्रति लीटर 300 मिलीग्राम से कम लवणता की सूचना नहीं दी है, जो पीने के लिए असुरक्षित है। इसलिए लोग गहरे नलकूपों से निकलने वाले पानी को नहीं पीते हैं। यह आजादी से पहले की एक अपरिवर्तित व्यवस्था है। जैसे कि तोमा हिंगलगंज ब्लॉक में बैलानी बाजार के पास सड़क किनारे पीएचई जलाशय से पानी भरती करती है।

सरकारों ने क्या किया?

  • केंद्र सरकार ने 2009 में राष्ट्रीय ग्रामीण पेयजल कार्यक्रम शुरू किया था, जिसका उद्देश्य हर ग्रामीण परिवार को स्थायी आधार पर पीने, खाना पकाने और अन्य घरेलू जरूरतों के लिए सुरक्षित और पर्याप्त पानी उपलब्ध कराना था।

  • पश्चिम बंगाल की राज्य सरकार ने 2020 तक 70 प्रतिशत ग्रामीण परिवारों को पाइप से पानी उपलब्ध कराने की योजना बनाई थी। हालांकि अभी तक सिर्फ 25 फीसदी परिवारों को ही यह सुविधा मिली है।

  • बंगाल सरकार ने पिछले साल केंद्रीय निधि की सहायता से अगले पांच वर्षों में दो करोड़ ग्रामीण परिवारों को पाइप से पानी की आपूर्ति प्रदान करने के लिए 58,000 करोड़ रुपये की जल स्वप्न परियोजना की घोषणा की है।

अब देखना होगा ये सभी योजनाएं और घोषणाएं प्रभावी रूप से धरातल पर कब उतरती हैं।

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