‘लॉस ऑफ हियरिंग’, हमेशा के लिए बहरा कर सकता है कोरोना वायरस!

‘लॉस ऑफ हियरिंग’, हमेशा के लिए बहरा कर सकता है कोरोना वायरस!

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Ashish Urmaliya | Pratinidhi Manthan

कोरोना वायरस (कोविड-19) के कारण मानव हमेशा के लिए सुनने की शक्ति (Loss of hearing) खो सकता है. ब्रिटिश एक्सपर्ट्स के मुताबिक, अचानक हुई इस समस्या का जल्द पता लगाने और इलाज कराने की जरूरत है. उन्होंने बताया कि कोरोना वायरस (Corona virus) लॉस ऑफ स्मैल, लॉस ऑफ टेस्ट से लेकर शरीर के विभिन्न अंगों को डैमेज कर सकता है तथा शरीर को असंख्य तरीकों से प्रभावित भी करता है.

हाल ही में डॉक्टर्स को ताजा प्रमाण मिले हैं कि कोविड-19 (Corona virus)  इंसान की सुनने की शक्ति को भी छीन सकता है. यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन (University College London) की 'जर्नल बीएमजे' में प्रकाशित एक रिपोर्ट के मुताबिक, 45 साल के एक कोविड-19 और अस्थमा से संक्रमित व्यक्ति को ICU (इंटेंसिव केयर यूनिट) में वेंटिलेशन पर रखा गया था. मरीज को यहां एंटी-वायरल ड्रग रेमेडिसवीर और नसों में स्टेरॉयड दिया गया था. ICU (इंटेंसिव केयर यूनिट) से निकलने के तकरीबन एक हफ्ते बाद उस मरीज के कान में अजीब सी झनझनाहट (रिंगिंग साउंड) होने लगी और बाद में बाएं कान से सुनने की शक्ति चली गई. इस घटना के बाद डॉक्टर्स ने अपनी सफाई में कहा, कि 'मरीज के कान में कोई समस्या नहीं थी. इसलिए उसे ऐसी कोई दवा नहीं दी गई थी, जिससे उसकी सुनने की शक्ति पर असर पड़े.' ये घटने होने के बाद डॉक्टर्स ने अपनी खोज पड़ताल को और बढ़ा दिया।

आगे की जांच की गई, पता लगा कि मरीज को फ्लू या एचआईवी भी नहीं था, इसलिए ऑटोइम्यून की समस्या के भी कोई संकेत नहीं दिखे जो हियरिंग लॉस की पेरशानी से जुड़े होते हैं. इसके अलावा, संबंधित व्यक्ति को पहले कभी सुनने से जुड़ी समस्या भी नहीं हुई थी. फिर इसके बाद की टेस्टिंग में पता चला कि मरीज के बाएं कान में 'सेंसोरिन्यूरल हियरिंग लॉस' हुआ है. यह एक ऐसी स्थिति होती है जिसमें कान का अंदरुनी हिस्सा या आवाज के लिए जिम्मेदार नर्व्स क्षतिग्रस्त हो जाते हैं. आंशिक सफलता के साथ स्टेरॉयड से इसका इलाज किया जाता है, जो उस मरीज का किया गया.

ब्रिटेन में यह अपने आप में इकलौता ऐसा केस सामने आया है. हालांकि बाकी देशों की तुलना में यहां कम संख्या में मामले दर्ज किए गए हैं. स्टडी के सह लेखिका डॉ. स्टेफनिया कोउम्पा के मुताबिक, 'यह अभी तक स्पष्ट नहीं हुआ है कि कोविड-19 कैसे सुनने की शक्ति को डैमेज करता है, लेकिन इसकी प्रबल संभावना हो सकती है.' इसलिए हमें सतर्क रहने की आवश्यकता है.

डॉ. स्टेफनिया ने बताया, 'ये संभव है कि Sars-Cov-2 वायरस कानों के अंदरुनी हिस्से की कोशिकाओं में जाकर उसे क्षतिग्रस्त कर सके या शरीर में साइटोकिन्स नाम के इन्फ्लेमेटरी कैमिकल के रिलीज होने का कारण बन जाए जो कि कान के लिए जहरीला हो सकता है.' उन्होंने बताया कि इन्फ्लेमेटरी कैमिकल्स या साइटोकिन्स के प्रोडक्शन की संभावना को स्टेरॉयड कम करने में मदद कर सकता है. वाकई कोविद 19 बला क्या है यह अभी तक इतने महीने बाद  समझ नहीं आ रहा है.

रिसर्च टीम के मुताबिक, कोविड-19 मरीज से आईसीयू में सबसे पहले कान से जुड़ी समस्या के बारे में पूछा जाना चाहिए था और उसे इमरजेंसी में इलाज के लिए भेजना चाहिए था. डॉ. कॉउम्पा ने कहा, 'एक कान से सुनने की शक्ति खोने का किसी व्यक्ति की जिंदगी पर बड़ा असर पड़ता है.' और वे सलाह देते हैं कि दुनिया भर में हर एक मरीज से उसके इलाज़ से पहले उसकी हर तरह की पुरानी बीमारी की जानकारी ली जाए.

यूनिवर्सिटी ऑफ मैनचेस्टर में ऑडियोलॉजी के प्रोफेसर केविन मुनरो इस रिसर्च का हिस्सा नहीं थे. लेकिन फिर भी उन्होंने बताया कि खसरा या मम्प्स (कनफेड़) जैसी बीमारियों के लिए जिम्मेदार वायरस कानों को क्षति पहुंचा सकते हैं. प्रोफेसर केविन मुनरो ने यह जानकारी भी दी कि उन्होंने अपनी टीम के साथ अस्पताल में एडमिट कोविड-19 के मरीजों का सर्वे किया था. सर्वे में 121 मरीज़ों में से 16 ऐसे मरीज भी मिले जिन्हें डिस्चार्ज होने के दो महीने बाद सुनने की समस्या होने लगी. मुनरो ने बताया कि उनकी टीम अब इस समस्या के कारणों का पता लगाने में जुटी हुई है. कोरोना महामारी से जुड़ा यह के नया और बड़ा खुलासा है, जिससे पूरी दुनिया के डॉक्टरों को सतर्क रहना चाहिए.

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