उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री व दिग्गज नेता कल्याण सिंह का 89 साल की उम्र में निधन

श्री कल्याण सिंह राम जन्मभूमि आंदोलन के प्रमुख वास्तुकारों में से एक थे। 2020 में उन्होंने एक बड़े अंग्रेजी अख़बार को दिए अपने साक्षात्कार में कहा था कि वह श्री राम मंदिर के शहर यानि अयोध्या में पुनर्जन्म लेना चाहते हैं।
उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री व दिग्गज नेता कल्याण सिंह का 89 साल की उम्र में निधन

उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और राजस्थान के पूर्व राज्यपाल कल्याण सिंह का शनिवार को लखनऊ के संजय गांधी पोस्टग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज में सेप्सिस और मल्टी-ऑर्गन फेल्योर के कारण निधन हो गया है। दिग्गज नेता को संक्रमण और चेतना का स्तर कम होने के कारण 4 जुलाई को अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में भर्ती कराया गया था। शुक्रवार को अस्पताल के अधिकारियों ने बताया कि उनका स्वास्थ्य गंभीर है और उन्हें लाइफ सेविंग सपोर्ट सिस्टम पर ले जाया जा रहा है।

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह सहित भाजपा नेताओं ने इसी महीने अस्पताल जाकर कल्याण सिंह जी से मुलाकात की थी। शुक्रवार को यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी अस्पताल जाकर उनसे मुलाकात की थी।

कल्याण सिंह, जिन्हें 'बाबूजी' के नाम से जाना जाता है, 1991 में पहली बार राज्य के मुख्यमंत्री बने। 1992 में जब बाबरी मस्जिद को गिराया गया था, तब वह राज्य के मामलों के शीर्ष पर थे। कई साक्षात्कारों में, उन्होंने बताया 6 दिसंबर को क्या हुआ था। अगस्त 2020 में अयोध्या में राम मंदिर के भूमि पूजन से ठीक पहले उन्होंने कहा था कि वह श्री राम मंदिर वाले शहर यानि अयोध्या में पुनर्जन्म लेना चाहते हैं। कल्याण सिंह जी ने एक प्रतिष्ठित अंग्रेजी अख़बार हिंदुस्तान टाइम्स को साक्षात्कार में कहा था, "मुझे बताया गया कि केंद्रीय बल अयोध्या की ओर जा रहे हैं, लेकिन साकेत कॉलेज के बाहर कार सेवकों ने उनकी आवाजाही रोक दी। मुझसे पूछा गया था कि क्या कार सेवकों पर फायरिंग का आदेश देना है या नहीं। मैंने लिखित में अनुमति देने से इनकार कर दिया और अपने आदेश में कहा, जो अभी भी फाइलों में है, कि फायरिंग से देश भर में कई लोगों की जान, अराजकता और कानून-व्यवस्था की समस्या होगी।

मुख्यमंत्री के रूप में पहले कार्यकाल में विवादस्पद होने के बाद भी, कल्याण सिंह 1997 में भाजपा और बसपा के बीच सत्ता-साझाकरण समझौते के बाद एक बार फिर मुख्यमंत्री बने। बसपा द्वारा सरकार से अपना समर्थन वापस लेने के बाद भी, वह मुख्यमंत्री बने रहे क्योंकि कांग्रेस के एक धड़े ने कल्याण सिंह सरकार को समर्थन दे दिया था। हालांकि 1998 में, कांग्रेस के उस गुट द्वारा अपना समर्थन वापस लेने के बाद, कल्याण सिंह की सरकार को राज्यपाल द्वारा बर्खास्त कर दिया गया था।

कल्याण सिंह का भाजपा से जुड़ाव कई उतार-चढ़ावों से भरा रहा है। स्कूली शिक्षा के दौरान से ही RSS के सदस्य रहे कल्याण सिंह भारतीय जनसंघ, ​​जनता पार्टी और फिर भाजपा के सदस्य भी रहे। मुख्यमंत्री के रूप में अपने दूसरे कार्यकाल के दौरान, उन्हें मुख्यमंत्री पद से हटा दिया गया था इसलिए उन्होंने एक नई पार्टी, राष्ट्रीय क्रांति पार्टी बनाने के लिए भाजपा छोड़ दी।

हालांकि 2004 में वे फिर से भाजपा में शामिल हो गए और 2009 में फिर से पार्टी से बाहर हो गए। 2009 के लोकसभा चुनावों में, उन्होंने एक स्वतंत्र उम्मीदवार के रूप में एटा से जीत हासिल की। 2010 में, उन्होंने जन क्रांति पार्टी के गठन की घोषणा की और चार साल बाद, वह फिर से भाजपा में आ गए। उसी वर्ष, उन्हें राजस्थान का राज्यपाल नियुक्त किया गया, 2019 में उन्होंने अपना कार्यकाल पूरा किया था।

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