यह बैंक बिना 'केवाईसी (KYC)' किये देता है लोन, फिर भी घाटा शुन्य! जानिए कैसे ?

यह बैंक बिना 'केवाईसी (KYC)' किये देता है लोन, फिर भी घाटा शुन्य! जानिए कैसे ?

आज कल ज्यादातर लोग बैंक लोन लेते हैं चाहे वो घर बनाने के लिए हो, कार लेने के लिए हो या फिर खुद का व्यापार शुरू करने के लिए। सरकार ने भी आम से लेकर ख़ास जनता के लिए लोन से जुड़ी विभिन्न योजनाएं लागू कर रखी । हो सकता है आपने भी कभी बैंक लोन लिया हो. नियमानुसार, लोन लेने से पहले बैंक अपने ग्राहक से 'केवाईसी' प्रक्रिया पूरी करने को ज़रूर कहता है। KYC (Know Your Customer) अथवा अपने ग्राहक को जानिये, कोई भी बैंक ग्राहक को तभी लोन देता है जब वह उससे जुड़ी पूरी जानकारी प्राप्त कर लेता है। बिना 'केवाईसी (KYC)' प्रक्रिया को पूरा किये कोई भी बैंक आपको हरगिज़ लोन नहीं दे सकता।

लेकिन अगर हम आपसे कहें कि, एक बैंक ऐसा भी है जो बिना केवाईसी (KYC) किये लोगों को लोन दे रहा है तो आपकी क्या प्रतिक्रिया होगी?

जी हाँ, हम बात कर रहे हैं अहमदाबाद के कोऑपरेटिव बैंक की, यहां ग्राहकों को बिना 'केवाईसी' के लोन मिलता है और एक-दो नहीं बल्कि अब तक हज़ारों लोगों को इस तहर का लोन दिया जा चुका है। इससे भी ज्यादा चौंकाने वाली बात यह है कि, बिना 'केवाईसी' के लोन दिए जाने के बावजूद भी इस बैंक का एनपीए (नॉन परफॉर्मिंग एसेट्स) शून्य है।

आपको बता दें, अहमदाबाद स्थित कालूपुर कमर्शियल कोऑपरेटिव बैंक की स्थापना 1970 में हुई थी। कालूपुर नाम के इलाके से शुरुआत होने की वजह से इस बैंक का नाम भी उसी इलाके के नाम पर रख दिया गया है। बैंक की तरफ से बिना केवाईसी का यह लोन बड़े पैमाने पर बंजारों को दिया जाता है, जो घूमने फिरने वाले समुदाय के लोग होते हैं और एक जगह पर स्थिर नहीं रहते। बावजूद इसके बैंक का एनपीए (नॉन परफॉर्मिंग एसेट्स) शून्य है। बता दें, एनपीए एक बैंकिंग टर्म है जिसमें बैंक द्वारा ग्राहक को दिए गए ऋण से कोई लाभ प्राप्त नहीं होता।

कालूपुर का यह बैंक अब तक लगभग 1800 लोगों को 7 करोड़ से अधिक का लोन बिना केवाईसी का लोन दे चुका है, इसके पीछे का मुख्य उद्देश्य पिछड़े लोगों को बैंकिंग सिस्टम का पूरा लाभ देना है। सभी ग्राहक बड़ी ही ईमानदारी से बैंक का पैसा लौटा रहे हैं. पिछले 10 सालों में 7 करोड़ में से मात्र डेढ़ लाख रूपए की रकम ही ऐसी है जो वापस नहीं आई है। इस लोन की अधिकतम राशि सीमा 50

हज़ार रूपए की होती है, और यह लोन बिना घर-ठिकाने वाले लोगों को दिया जाता है। जबकि आरबीआई के निर्देशों के अनुसार, घर के एड्रेस की जाँच किये बिना कोई भी बैंक लोन नहीं दे सकता। लेकिन यह बैंक अपने आप में ही अनोखा है।

यह लोन अहमदाबाद के पास ओढव इलाके के ज्यादातर झाड़ू बनाने और छोटे-मोटे काम करने वाले बंजारों ने लिया है। जिसकी अधिकतम राशि 40000 रूपए है. इस राशि से वे कच्चा माल खरीदकर झाड़ू बनाते हैं और शहरों में बेचते हैं. बिना कोई हिसाब-किताब किये ये लोग बड़ी ही ईमानदारी से अपना कर्जा चुका रहे हैं और ख़ुशी से जीवन यापन कर रहे हैं। हालांकि अभी भी इनकी झोपड़ियों में लाइट, पानी जैसी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं।

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