फांसी की सजा का पूरा हिसाब- किताब

फांसी की सजा का पूरा हिसाब- किताब

AshishUrmaliya || Pratinidhi Manthan

कोर्टने नया ब्लैक वारंट जारी कर दिया है, अब निर्भया मामले के चारों दोषियों को 1 फरवरीके दिन सुबह 6 फांसी दे दी जायेगी।  

खैर,आज मैं फांसी की सजा के बारे में बात करने आया हूं.  

जबकिसी को फांसी की सजा होती है तो उसके भीतर क्या बीतती होगी, वो सिर्फ वही जान सकताहै। लेकिन एक बात तो तय है, कि उस वक्त किये गए गुनाह का एक-एक पल उसकी आंखों से सामनेघूमता जरूर होगा और वो सोचता होगा कि काश में टाइम ट्रेवल करके पीछे जा पता और सबकुछठीक कर पाता।

नेशनलक्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो के मुताबिक, आजादी के बाद से लेकर अब तक हमारे देश में करीब1500 लोगों को फांसी की सज़ा सुनाई जा चुकी है। और इन 1500 में से सिर्फ 21 लोग ऐसेहैं जिन्हें फांसी के फंदे पर लटकाया गया है। बाकी के कुछ अपराधियों की सज़ा माफ़ करदी गई. तो कुछ कैदियों ने खुद ही तय तारीख से पहले आत्महत्या कर ली।     

फांसीकी सजा दिल्ली के तिहाड़ जेल की बैरक नंबर 3 में दी जाती है। इसके अलावा देश में 30अन्य ऐसी जेलें हैं जहां फांसी के तख्ते बने हुए हैं और वहां की सजा दी जा सकती है।

तोसबसे पहले कोड ऑफ क्रिमिनल प्रोसिजर के तहत ब्लैक वारंट जारी किया जाता है। इसे ब्लैकवारंट इसलिए कहा जाता है क्योंकि इसमें फांसी की तारीख और समय लिखा होता है और इसकेचारों तरफ काले रंग की एक पट्टी बनी हुई होती है जिसे हम बॉर्डर कह सकते हैं।

फांसीके पहले कैदी को 14 दिन का वक्त दिया जाता है, चाहे तो वह अपने परिवार से मिल सकताहै, न्यायिक सहायता ले सकता है, राष्ट्रपति के सामने दया की गुहार लगा सकता है, इसकेसाथ ही अपना विल भी तैयार कर सकता है मतलब, मृत्यु से पहले अपनी कोई अंतिम इच्छा बयानकरना चाहता हो, तो इसमें लिख सकता है।  

अपराधीको स्पेशल वार्ड में रखा जाता है. इसी दौरान हर रोज उसकी काउंसलिंग भी की जाती है.मतलब, मेडिकल जांच बगैरह की जाती है.

इसकेसाथ ही अगर मुजरिम चाहता है, कि फांसी के वक्त वहां पंडित, पादरी या मौलवी मौजूद होतो इसका इंतजाम भी किया जाता है.

फांसीकी पूरी तैयारी के लिए उस जेल का सुप्रीटेंडेंट जिम्मेदार होता है.

सुप्रीटेंडेंटही यह सुनिश्चित करते हैं, कि फांसी का फंदा, तख्ता, नकाब समेत सभी चीज़ें तैयार हैया नहीं।  जो खींचा जाता है, लीवर उसको भी चेक्सकरते हैं कि उसमें पर्याप्त तेल डला हुआ है या नहीं। और सुनने में आया है, कि इस बारजो फांसी का फंदा यूज किया जाएगा उस एक फंदे की कीमत 2120 रुपए है.

फांसीके ठीक एक दिन पहले एक बार फिर तख्ते, फंदे, लीवर की जाँच की जाती है, साफ सफाई कीजांच की जाती है. फंदे पर अपराधी के वजन से डेढ़ गुना ज्यादा वजन वाले रेत के बोरे कोलटका कर देखा जाता है. कि सही है या नहीं।  

फांसीके दो दिन पहले ही जल्लाद को बुला लिया जाता है और जेल में ही रोका जाता है.

फांसीहमेशा सुबह के वक्त ही दी जाती है। 6, 7 या ज्यादा से ज्यादा 8 बजे। इसके पीछे के दोकारण हैं. पहला, कि जेल के अन्य कैदी फांसी से बाधित न हों और दूसरा कि अपराधी के परिवारको उसके अंतिम संस्कार के लिए पर्याप्त वक्त मिल सके.

फांसीके तय वक्त के कुछ मिनट पहले जेल के सुप्रीटेंडेंट और डिप्युटी सुप्रीटेंडेंट अपराधीकी सेल में जाते हैं और वारंट में लिखे नाम के आधार पर अपराधी को आइडेंटिफाई करते हैं।कि वो वही है या नहीं। फिर अपराधी की ही भाषा में उसका डेथ वारंट पढ़कर सुनाया जाताहै। उसके बाद सुप्रीटेंडेंट की ही मौजूदगी में अपराधी की बातों को रिकॉर्ड किया जाताहै। आप सोच सकते हैं उस वक्त अपराधी क्या कह रहा होगा।

रिकॉर्डकरने के बाद सुप्रीटेंडेंट फांसी वाली जगह पर चले जाते हैं और डेप्युटी सुप्रीटेंडेंटकैदी की सेल में ही रहता है। उन्ही की मौजूदगी में कैदी को नहलाया जाता है काले कपडेपहनाए जाते हैं. हांथों को पीछे से बांध दिया जाता है. अगर कैदी के पैरों में बेड़ियांहैं तो उन्हें काट दिया जाता है।

फिरआता है वो वक्त जो कैदी के जहन में खलबलाहट पैदा कर देने वाला होता है. डेप्युटी सुप्रीटेंडेंट,मुख्य वार्डन और 6 अन्य वार्डनों के साथ कैदी को तख्ते तक लेकर आते हैं. दो वार्डनकैदी की बाहें पकड़े हुए होते हैं. 2 थोड़ा पीछे चल रहे होते हैं, और बाकि के दो सुप्रीटेंडेंटके साथ चल रहे होते हैं. जेल के मुख्य सुप्रीटेंडेंट, एक्सिक्यूटिव मजिस्ट्रेट और मेडिकलअफसर पहले से ही वहां पर मौजूद होते हैं. कैदी तख्ते तक पहुँचता है. वार्डन उसे फंदेके ठीक नीचे खड़ा कर देते हैं. 

अबकाम शुरू होता है जल्लाद का जिसे अंग्रेजी में हैंगमैन कहा जाता है-   जल्लाद कैदी के पैरों को टाइट बांध देता है. फिरउसे नकाब पहनाता है और उसके बाद उसके गले में फांसी का फंदा पहनाता है. इसके बाद वार्डनअपराधी के हाथ छोड़कर पीछे हो जाते हैं.

फिरजैसे ही सुप्रीटेंडेंट इशारा करते हैं जल्लाद लीवर खींच देता है. फट्टे नीचे गिर जातेहैं और मुजरिम फंदे पर लटक जाता है.

फंदाटाइट होता जाता है और धीरे- धीरे वह मर जाता है. बॉडी आधे घंटे तक लटकती रहती है फिरडॉक्टर जाकर चेक करते हैं कि उसकी मृत्यु हुई या नहीं। उसके बाद उसे मृत घोषित कर दियाजाता है और पोस्ट मार्टम के लिए भेज दिया जाता है.

इसीबीच कुछ लीगल फॉर्मलिटीज होती हैं और शव को उसके परिवारवालों को सौंप दिया जाता है.

इनकेस, कोई ऐसा अपराधी है जिसकी मृत्यु के बाद बाहर हलचल मच सकती है तो उस शव को सुप्रीटेंडेंटही की मौजूदगी में किसी गुप्त स्थान पर जला या दफना दिया जाता है. 

सबसेमहत्वपूर्ण बात ये है कि फांसी की सजा पब्लिक हॉलिडे वाले दिन नहीं दी जाती। 

औरजो कुछ अफवाहें हैं कि फांसी के वक्त जल्लाद कैदी के कान में कहता है जैसे- 'हिंदुओंको राम-राम मुसलामानों को सलाम, मैं अपने फर्ज के चलते मजबूर हूं, मैं आपके सत्य कीराह में चलने की कामना करता हूँ' ये सब बिलकुल ही फालतू बात है ऐसा कुछ नहीं होता।

Pratinidhi Manthan
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