अब देश में बनेगा वेस्ट प्लास्टिक का डीजल, यहां लग गया है प्लांट 
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अब देश में बनेगा वेस्ट प्लास्टिक का डीजल, यहां लग गया है प्लांट

Manthan

अब देश में बनेगा वेस्ट प्लास्टिक का डीजल, यहां लग गया है प्लांट

Ashish Urmaliya || The CEO Magazine

दुनिया में सिर्फ तीन ऐसी जगहें है जहां प्लास्टिक वेस्ट से डीजल बनाया जाता है। और अब देहरादून, भारत के  इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ़ पेट्रोलियम (IIP) परिसर में प्लास्टिक वेस्ट से डीजल बनाने वाला दुनिया का चौथा प्लांट लग चुका है। यहां वेस्ट प्लास्टिक से डीजल के साथ और भी कई अन्य तरह के पेट्रो प्रोडक्ट्स तैयार किये जायेंगे।

वैज्ञानिकों के अनुसार इस प्लांट में आसानी से डीजल बनाया जा सकेगा, जिसका उपयोग वाहनों के साथ ही साथ औद्योगिक क्षेत्रों में भी किया जा सकेगा। सबसे बढ़िया और ख़ास बात यह है, कि जो सिंगल यूज प्लास्टिक एक बड़ी समस्या बन चुका है, पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वला सबसे बड़ा कारण बन चुका है, जीव-जंतुओं के लिए भी सबसे बड़ा खतरा है, जिसको गलने में लगभग 1000 वर्ष का वक्त लगता है, अब उस प्लास्टिक वेस्ट का सदुपयोग होगा।

मानवों के साथ पशुओं को भी फायदा होगा-

पर्यावरण शुद्ध और खुशनुमा बनेगा और डीजल भी बनेगा, तो मनाव को तो फायदा ही फायदा है, लेकिन इसके साथ ही साथ नदी, नाले, गोवंश और पशुओं  को भी इसका फायदा होगा। नदी नाले साफ होंगे पशुओं को भी शुद्ध वातावरण मिलेगा। और जो पशु अपनी भूख को मिटाने के लिए सड़क किराने पड़े वेस्ट प्लास्टिक को खा कर मर जाते हैं। यह समस्या भी ख़त्म हो जाएगी। बताते चलें, पिछले साल आईआईपी के वैज्ञानिकों ने बायोफ्यूल बनाया था, जिसके जरिये देहरादून से लेकर दिल्ली तक ऐरोप्लेन उड़ा था। भारत के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री हर्षवर्धन ने कहा है, कि इस तरह का प्लांट देश के विभिन्न राज्यों में भी लगाया जायेगा।

इस प्लास्टिक वेस्ट प्लांट मॉडल को देश के अन्य राज्यों में भी अपनाया जायेगा, फिलहाल देहरादून का यह प्लांट एक पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर शुरू किया गया है। आगे इसे एक कमर्शियल लेवल पर शुरू किये जाने की योजना है। जानकारों के मुताबिक, एक प्लांट की लागत को 3 साल के अंदर इसी प्लांट की कमाई से वसूला जा सकता है।

प्लांट बनाने में लगा 10 साल का वक्त-

फिलहाल जो पहला प्लांट लगाया गया है वह 1 टन की क्षमता वाला है, जिससे 800 लीटर डीजल बनाने का काम शुरू हो चुका है। इस प्लांट को 10 साल की कड़ी मेहनत से तैयार किया गया है। जिसका शुभारंभ केंद्रीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्री हर्षवर्धन ने किया है। आने वाले समय में 5 से 10 टन वाले प्लांट बनाने की योजना बनाई जा रही है। बता दें, प्लांट से सबसे पहले निकलने वाले तेल का इस्तेमाल सरकारी व सेना के वाहनों और संस्थान के अधिकारियों और कर्मचारियों के वाहनों में इस्तेमाल किया जायेगा।

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