नई दिल्ली, 23 मार्च 2026: विश्व जल दिवस के उपलक्ष्य में धानुका एग्रीटेक लिमिटेड ने नई दिल्ली के लोधी एस्टेट में विशेष प्रोग्राम का आयोजन किया, जो इस साल की ग्लोबल थीम ‘वॉटर एंड जेंडर’ पर आधारित था। चर्चा के दौरान पानी की पहुंच के मामले में लिंग आधारित असमान बोझ पर रोशनी डाली गई, एक अनुमान के मुताबिक भारत की महिलाएं रोज़ाना 5.5 करोड़ घण्टे पानी लाने में खर्च करती हैं। यह थीम लिंग-अनुकूल जल प्रशासन, बेहतर लास्ट माईल डिलीवरी और समावेशी बुनियादी ढांचे का आह्वान करती है ताकि ग्रामीण एवं कृषि समुदायों में समय की कमी को दूर किया जा सके और सामाजिक-आर्थिक भागीदारी को मजबूत बनाया जा सके।
प्रोग्राम की शुरूआत दीप प्रज्जवलन एवं सरस्वती वंदना के साथ हुइ। अग्रणी नीतिनिर्माताओं और वैज्ञानिकों ने प्रोग्राम में हिस्सा लिया। इनमें डॉ. देबाशीष चक्रवर्ती (आईएआरआई), डॉ. मान सिंह (पूर्व परियोजना निदेशक, डब्ल्यूटीसी, आईएआरआई), डॉ. पी.एस. ब्रह्मानंद (परियोजना निदेशक, डब्ल्यूटीसी, आईएआरआई), डॉ. पी. के. सिंह, कृषि आयुक्त, कृषि मंत्रालय, भारत सरकार, और डॉ. एम. मधु, निदेशक, भारतीय मृदा एवं जल संरक्षण संस्थान, देहरादून शामिल थे।
सभा को सम्बोधित करते हुए डॉ राज भूषण चौधरी, राज्य मंत्री, जल शक्ति मंत्रालय ने इस प्रोग्राम के आयोजन के लिए धानुका एग्रीटेक को धन्यवाद दिया और जलवायु-अनुकूल कृषि में योगदान के लिए श्री आर.जी. अग्रवाल की सराहना की। उन्होंने कहा कि माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में जल जीवन मिशन जैसी बदलावकारी पहलों ने 15 करोड़ से अधिक ग्रामीण परिवारों तक नल का पानी पहुंचाया है। जिससे महिलाओं पर बोझ कम हुआ है और भारत का जल सुरक्षा ढांचा मजबूत हुआ है।
इस अवसर पर सभा को सम्बोधित करते हुए श्री आर.जी. अग्रवाल चेयरमैन एमेरिटस, धानुका एग्रीटेक लिमिटेड ने कहा कि भारत के पास दुनिया के केवल 4 फीसदी जल संसाधन हैं, जो 18 फीसदी आबादी को सपोर्ट करते हैं, ऐसे में देश के लिए जल संरक्षण बेहद ज़रूरी है। उन्होंने कहा कि धानुका राजस्थान में चैक डेम के निर्माण, वर्षा जल संचय, भूमिगत जल स्तर में सुधार और जागरूकता बढ़ाने के लिए निरंतर प्रयास कर रही है। 2005 में दिए गए नारे ‘खेत का पानी खेत में, गांव का पानी गांव में’ को याद करते हुए उन्होंने दोहराया कि ‘पानी को बनाया नहीं जा सकता, इसे सिर्फ संरक्षित किया जा सकता है।‘ एक संदेश जिसे ब्रांड अम्बेसडर श्री अमिताभ बच्चन ने कंपनी के कैंपेन के दौरान दिया है।
वैज्ञानिक परिप्रेक्ष्य पर बात करते हुए डॉ एम मधु ने व्यवस्थित मृदा एवं जल प्रबन्धन के महत्व पर ज़ोर देते हुए कहा कि मिट्टी के स्वास्थ्य को सशक्त बनाना, इनफिल्टरेशन को बढ़ाना, फील्ड बंडिंग के ज़रिए रनऑफ को रोकना तथा खेत में जल संचय संरचनाएं बनाना दीर्घकालिक स्थिरता को सुनिश्चित करने के लिए ज़रूरी है।
प्रोग्राम का समापन पानी के ज़िम्मेदाराना इस्तेमाल को बढ़ावा देने की सामुहिक शपथ के साथ हुआ, साथ ही जल-सुरक्षित एवं एक समान भारत के निर्माण के लिए सरकार, अनुसंधान संस्थानों, उद्योग जगत एवं किसानों के बीच आपसी सहयोग को बढ़ावा दिया गया।
धानुका एग्रीटेक ने दोहराया कि स्थायी कृषि और ज़िम्मेदाराना जल प्रबन्धन इसके दीर्घकालिक दृष्टिकोण का केन्द्र हैं। जल संरक्षण गतिविधियों एवं किसान उन्मुख समाधानों में सतत निवेश के द्वारा धानुका भावी पीढ़ियों के लिए इस कीमती संसाधन को सुरक्षित रखने के लिए प्रतिबद्ध है।